मैंने अपने कस्टमर की वर्जिन चूत मारी

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मेरा नाम अरुण है मैं अपने पापा के शॉप पर शॉपकीपर का काम करता हूं। हमारी दुकान पर कई कस्टमर आते जाते रहते हैं। मेरे दोस्त ने मुझसे कहा की उसे भी यहां जॉब करनी है मैंने अपने पापा से कह कर उसे भी यहां जॉब दिला दी। हम दोनों साथ साथ काम करते अगर कभी कोई गलती हो जाए तो मेरे पापा बहुत डांट लगाते हैं। एक दिन हमारी दुकान पर दो लड़कियां आई। उन्होंने हमारी दुकान से सामान खरीदा और बिल बनाने मेरे पास आई। जब वह सामान लेकर बाहर गए तो थोड़ी देर बाद उनमें से एक लड़की दोबारा अंदर आई और उसने कहा कि उसका कुछ सामान दुकान मे रह गया है। वह वही लेने आई थी उसने वह सामान लिया और वहां से चली गई। ऐसे ही लगातार कुछ दिनों तक वह लड़की हमारी दुकान पर आने लगी थी और हमेशा कुछ ना कुछ खरीद कर जाती थी। वह पहले पूरी शॉप पर घूमती उसके बाद मेरी हेल्प से कुछ सामान लेती। मुझे भी यह सब अच्छा लगता था।

एक दिन मैंने उससे उसका नाम पूछा उसका नाम रीना था। उसने भी मेरा नाम पूछा और फिर वह मेरा नंबर मांगने लगी। मैंने उससे कहा कि नंबर का क्या करोगी फिर उसने कहा कि मुझे यहां रोज-रोज ना आना पड़े इसलिए मैं तुम्हारा नंबर मांग रही हूं। मैं उसकी बात को समझा नहीं फिर उसने कहा कि मैं तुम्हें फोन करके  अपना सामान घर पर मंगवा लिया करूंगी। मैंने कहा ठीक है मैंने उसे अपना नंबर दे दिया। कुछ दिन तक तो ना वह दुकान पर आई और ना उसने कोई फोन किया। मैं हमेशा उसे देखता रहता था। मैं यही सोचता कि वह किसी ना किसी टाइम तो दुकान पर आएगी इसीलिए मैं दिनभर दुकान पर ही रहता था। खाना भी मेरा दुकान पर ही आने लगा था। मैं वही खाना खाता और उसका इंतजार करता रहता लेकिन वह कई दिनों तक नही आई।

एक दिन अचानक उसने मुझे फोन किया। पहले तो मुझे पता नहीं था कि यह उसी का नंबर है। मैंने वह फोन नहीं उठाया क्योंकि मैं काम में व्यस्त था कई बार मेरा फोन बजता रहा फिर आखिर में मैंने वह फोन उठा ही लिया। जब मैंने फोन उठाया तो मैंने उसकी आवाज पहचान ली और मैं फटाफट से एक कोने में उससे बात करने के लिए चला गया। मैंने उससे पूछा कि तुम इतने दिन तक कहां थी। तुम तो दुकान पर भी नहीं आई और ना तुमने कोई फोन किया। उसने कहा कि मैं अपनी मम्मी लोगों के साथ कहीं जा रखी थी इसलिए मुझे समय नहीं मिल पाया। मैंने कहा अभी कहां है तुम्हारे मम्मी पापा लोग उसने कहा वह चले गए हैं। फिर उसने मुझसे कहा कि मुझे कुछ सामान चाहिए था। मैंने कहा हां बोलो मैं भिजवा देता हूं उसने कहा नहीं भिजवाना नहीं है। तुम ही वह सामान लेकर मेरे घर पर आना मैं खुश हो गया। मैंने जल्दी से कहा कि अपना एड्रेस दे दो मैं अभी सामान लेकर आता हूं। मैंने फटाफट उसका सामान पैक किया और अपने दोस्त को कहां की दुकान संभाल लेना और अगर पापा आए तो कहना कि मैं काम से बाहर गया हूं। इतना कहकर मैं वहां से निकल गया। जब मैं उसके घर पहुंच तो मैंने देखा उसने छोटे छोटे कपड़े पहने हुए थे। मुझे यह देख कर थोड़ा हैरानी हुई कि इसने ऐसे कपड़े क्यों पहने हैं। मैंने उससे पूछा कि तुम इतने छोटे कपडे क्यों पहनती हो तो उसने कहा कि अभी मैं घर पर ही हूं इसलिए मै ऐसे कपड़े पहन लेती हूं। उसने मुझे अंदर आने के लिए कहा मैं अंदर गया और बैठ गया। वह मुझसे पूछने लगी कि तुम कुछ खाओगे मैंने कहा नहीं फिर भी उसने मेरे लिए खाने के लिए कुछ बनाया। हम दोनों साथ में बैठकर मूवी देख रह थे।

जब हम मूवी देख रहे तो बीच-बीच में उसने मेरे लंड पर भी हाथ लगा दिया था। जिससे मैं उसके इरादों को समझ चुका था और मैंने भी उसके स्तनों पर दो-तीन बार हाथ लगा दिया था। वह बहुत खुश होती जब मैं उसके स्तनों पर अपने हाथ को फेर देता। उसने छोटी सी चड्डी पहनी हुई थी। मुझे उसकी गांड देख कर रहा नहीं जा रहा था। अब हम दोनों ऐसे ही मस्ती करने लगे और मैंने उसकी गांड को जोर से दबाना शुरू किया। मैंने उसकी छोटी सी नेकर से अपने हाथ को उसकी गांड के अंदर डाल दिया तो मुझे प्रतीत हुआ कि उसने अंदर से कुछ भी नहीं पहना हुआ है। वह यहा वहा भागने लगी भागते-भागते मैंने उसे कसकर पकड़ लिया और उसके स्तनों को दबाने लगा। मैंने उसकी छोटी सी निक्कर को नीचे उतार दिया। उसकी पिंक चूत मुझे दिखाई दे गई और मेरा मन उसे देख कर ऐसा हुआ कि मै उसकी चूत में अपने लंड को डाल दू। मैंने उससे अपने कंधे पर उठाया और उसकी नेकर को पूरा नीचे उतार दिया। अब वह एकदम नंगी मेरे साथ मेरे कंधे पर थी।

मैंने उसे उसके सोफे पर पटक दिया जहां बैठकर हम लोग मूवी देख रहे थे। जैसे ही उसे मैंने नीचे पटका तो उसके स्तन हिलने लगे। मैंने उसकी दोनों टांगों को चौड़ा करते हुए उसकी चूत को अपने मुंह मे लेकर चाटने लगा। मैं अपने  दातों को उसकी चूत पर मार देता  मुझे ऐसा लग रहा कि मैं उसकी चूत को कच्चा ही चबा जाऊंगा। मैंने उसकी चूत के उभार को इतने अच्छे से अपने मुंह से चाटा की उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया और वो गीली हो गई। अब उसकी चूत से अंदर का माल बाहर गिरने लगा जिससे वह झड गई थी। वह मेरे पूरे कंट्रोल में थी मैंने भी अपने लंड को बाहर निकालते हुए उसके मुंह की तरफ बढ़ाया। पहले तो मैंने उससे अपने लंड को हाथ से हिलाने के लिए कहा उसने अपने गोरे-गोरे और मुलायम हाथों से  मेरे लंड को हिलाना शुरू किया। जैसे ही वह मेरे लंड को हिलाती जाती तो मेरा लंड और बड़ा हो जाता। उसने अपने मुंह में लेकर मेरे लंड चूसना शुरु किया। जैसे ही वह मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर चूसने लगी। उसका पूरा बदन लाल हो जाता क्योंकि उसे गर्मी का एहसास हो रहा था। मैंने अपने लंड को उसके मुंह से बाहर निकाला और अब उसके स्तनों को अपनी जीभ से चाटने लगा। उसके स्तन बहुत ही टाइट और गोल थे और वह इतने ज्यादा गोरे थे कि मेरी जीभ के निशान भी उसकी बदन पर साफ दिखाई दे रहे थे। मुझसे भी अब रहा नहीं जा रहा था और मैंने उसकी चूत पर अपना लंड लगा दिया। जैसे ही मैंने उसके चूत मै अपने लंड को लगाया तो उसकी चूत से पानी निकल रहा था। वह बहुत ज्यादा गर्म हो चुकी थी मैंने भी उसकी चूत में  अपना लंड डालना शुरू किया लेकिन उसकी चूत बहुत ज्यादा टाइट थी।

मेरा लंड अंदर नहीं जा रहा था मैंने कोशिश की और धीरे-धीरे अपने लंड को उसकी चूत के अंदर घुसा दिया। जैसे ही मैंने अपने लंड को उसके अंदर घुसाया तो वह चिल्ला पड़ी और बहुत तेजी से उसकी मुंह से आवाज निकल गई। अब वह मुझे कहने लगी तुमने मेरी वर्जिनिटी को खत्म कर दिया है तुमने मेरे नई चूत में अपना लंड डाल दिया है। मैंने जैसे ही अपने लंड की तरफ देखा तो उस पर खून लगा हुआ था। मेरे लंड उसकी चूत की सील तोड़ चुका था और उसका खून निकल रहा था। मैंने पहली बार अपनी जिंदगी में किसी वर्जिन लड़की को चोदा था। मुझे अपने आप पर बहुत गर्व महसूस हो रहा था। मैंने उसे इतना जोर का झटका मारना शुरू किया कि मैंने रुकने का नाम ही नहीं लिया। मेरे उन झटकों को वह बर्दाश्त नहीं कर पाती और उसकी गांड लाल हो जाती। वह मुझे कहने लगी कि तुम बहुत तेजी से झटके मार रहे हो जिससे कि मेरी सांसे रुक जाती हैं। मैंने उसे कहा पगली तेज झटके में तो मजा है। थोड़ी देर बाद हम दोनों का झड़ने वाला था। मेरा जैसे ही झडा मैंने तुरंत ही उसकी चूत में अंदर ही अपने वीर्य को गिरा दिया। मुझे यह सब करके बहुत शांति मिली और काफी अच्छा लगा। इतनी टाइट चूत मैंने आज तक नहीं मारी थी।

अब उसने कपड़े पहने और मैंने भी अपने कपड़े पहने  मैं बाथरूम में फ्रेश होने के लिए गया और जैसे ही लौटा तो मुझे याद आया कि मुझे तो दुकान पर भी जाना है। मैंने उससे कहा कि अब मुझे चलना चाहिए। मेरा दोस्त दुकान पर अकेला है वह अकेले नहीं संभाल पाएगा। वह मुझे बाहर तक छोड़ने आई और मैं दुकान पर चले गया फिर मेरे दोस्त ने पूछा कि इतनी देर कहां था फिर मैंने उसे सारी बात बताई और हम दोनों हंसने लगे।